
पीएमएस PMS ( Premenstrual syndrome ) महिलाओं को माहवारी शुरू होने से कुछ दिन पहले होने वाली एक आम परेशानी है। लगभग 85% महिलाओं को इस परेशानी से गुजरना पड़ता है।
हर महिला को मासिक धर्म के समय होने वाले रक्तस्राव को तो संभालना ही पड़ता है लेकिन बहुत सी महिलाओं को पीरियड शुरू होने के पहले होने वाली शारीरिक और मानसिक परेशानियों से भी गुजरना पड़ता है। ऐसा हार्मोन में परिवर्तन के कारण होता है जिसे पीएमएस PMS कहते हैं।
पीएमएस PMS का प्रभाव महिलाओं को शारीरिक , मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित करता है। माहवारी से पहले के कुछ दिनों में किसी भी महिला का बिना कारण गुस्सा करना , बहुत भावुक हो जाना , छोटी छोटी बात पर खीजना , छोटी से बात पर रो पड़ना आदि पीएमएस PMS के कारण हो सकता है। बहुत सी महिलाओं को इस समय स्तन में सूजन या दर्द तथा अन्य परेशानी भी हो सकती है।
खुद महिला या उसके साथी पुरुष के लिए इसे समझना थोडा मुश्किल हो सकता है , लेकिन इस समय धैर्य से काम लेने से तथा व्यस्त और खुश रहने की कोशिश करने से इन तकलीफों को कम किया जा सकता है। पीएमएस के लक्षण माहवारी Period शुरू होने वाली तारीख से पांच-दस दिन पहले दिखने शुरू हो जाते हैं।
पीएमएस की परेशानी मेनोपॉज की उम्र आने पर धीरे धीरे कम हो जाती है।
पीएमएस के लक्षण –
पेट फूलना , पेट में दर्द , स्तन में दर्द और सूजन , सिर दर्द , मुंहासे बढ़ना , मीठा खाने की तीव्र इच्छा , कब्ज या दस्त , प्रकाश या आवाज के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना , थकान , चिडचिड़ाहट , नींद में बदलाव , चिंता , फ़िक्र , डिप्रेशन , उदासी , भावनाएं फूट पड़ना आदि PMS के लक्षण हो सकते हैं।
पीएमएस का कारण –
निश्चित तौर पर पीएमएस का कारण निर्धारित नहीं है लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हार्मोन तथा सेरोटोनिन serotonin के स्तर में बदलाव होने से यह हो सकता है।
प्रजनन सम्बन्धी महिला हार्मोन इस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्ट्रोन का स्तर मासिक चक्र के बीच बदलता रहता है। 28 दिन का मासिक चक्र हो तो लगभग 14 वें दिन इस्ट्रोजन का लेवल सबसे ज्यादा होता है तथा लगभग 21 वें दिन प्रोजेस्ट्रोन का स्तर सबसे ज्यादा होता है। उसके बाद इनमे तेजी से गिरावट आ जाती है। इस बदलाव के कारण शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जिसके लक्षण पीएमएस के रूप में दिखने लगते हैं।
इस्ट्रोजन की अधिकता से स्तन की नसों में फैलाव आ सकता है तथा प्रोजेस्ट्रोन के कारण दूध की ग्रंथियों में सूजन आ सकती है। इन दोनों कारण से स्तन में हल्का दर्द व सूजन महसूस हो सकता है।
शरीर में मौजूद सेरोटोनिन नामक तत्व मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। इस तत्व के कारण मनोस्थिति , भावनाएं तथा विचारों में परिवर्तन हो सकता है। सेरोटोनिन की कमी से पीएमएस के लक्षण दिखाई पड़ सकते हैं।
इसके अलावा दिमाग में कुछ केमिकल्स में बदलाव तथा कुछ विटामिन और खनिज की कमी के कारण भी यह परेशानियाँ हो सकती हैं।
नमक वाली चीजों का ज्यादा सेवन , शराब तथा कैफीन आदि पीएमएस के लक्षण बढ़ा सकते हैं।
पीएमएस को कैसे पहचाने –
कभी कभी PMS के लक्षण तथा अन्य समस्या के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं जिनको पहचानने में भूल हो सकती है। ये लक्षण मेनोपोज की तैयारी , डिप्रेशन , तनाव , CFS , थायरोइड , IBS आदि के कारण भी हो सकते हैं।
इनमे मुख्य अंतर यह है कि PMS के लक्षण एक अलग ही तरीके से हर महीने शुरू होते हैं और अपने आप ठीक भी हो जाते हैं। पीएमएस को पहचानने के लिए एक केलेंडर में तीन महीने तक इसके लक्षण शुरू होने और ठीक होने की डेट और माहवारी की डेट को नोट कर लें। फिर देखें –
क्या ये लक्षण माहवारी से कुछ दिन पहले शुरू होते हैं ?
क्या माहवारी शुरू होते ही या एक दो दिन में लक्षण ठीक हो जाते है ?
क्या हर महीने पीरियड के समय ऐसा ही होता है ?
यदि इनका जवाब हाँ है तो आपको PMS होने की संभावना अधिक है।
पीएमडीडी PMDD –
किसी किसी महिला को पीएमएस के लक्षण की तीव्रता बहुत अधिक होती है जिसे PMDD Premenstrual dysphoric disorder कहते हैं। हालाँकि ऐसा 4-5% महिलाओं को ही होता है।
इसके होने से डिप्रेशन , आत्महत्या के विचार , अत्यधिक चिंता , गुस्सा , चिल्लाना , रोजाना के काम से विमुख होना , नींद ना आना , किसी चीज में ध्यान नहीं दे पाना , अत्यधिक खाना पीना ( binge eating ) , दर्दनाक ऐंठन महसूस करना , सूजन आना आदि हो सकते हैं।
ये लक्षण भी इस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन में बदलाव तथा सेरोटोनिन की कमी के कारण हो सकते हैं। यह प्रभाव वंशानुगत भी हो सकता है। PMS के उपाय से इस समस्या में भी आराम मिलता है।
PMS के घरेलु उपाय –
क्योकि PMS को कारण निश्चित नहीं है अतः खाने पीने में सावधानी तथा एक्सरसाइज़ , योग , प्राणायाम आदि की मदद से इसे कम किया जा सकता है। अधिक परेशानी होने पर चिकित्सक की सलाह से दवाएं ली जा सकती हैं। इसके लिए ये पीएमएस के घरेलु उपाय अवश्य करने चाहिए –
भोजन – Food
खाने पीने की चीजों में मौजूद ट्रिप्टोफेन Tryptophan नामक एमिनो एसिड सेरोटोनिन का लेवल बढ़ा सकता है। इससे मूड अच्छा रहता है , तनाव कम होता है और पीएमएस के लक्षण में आराम मिलता है। अधिक ट्रिप्टोफेन वाला आहार यदि कार्बोहाईड्रेट के साथ लिया जाये तो रक्त में सेरोटोनिन का स्तर अधिक बढ़ता है।
अधिक ट्रिप्टोफेन युक्त आहार में अनानास , मूंगफली , आलू , अखरोट , कद्दू के बीज , तिल , गेहूं , फूल गोभी , मशरूम , टोफू , अंडा आदी शामिल हैं। तिल में यह अत्यधिक मात्रा में होता है। अतः सर्दी के मौसम में तिल गुड़ के लड्ड़ू जरूर खाने चाहिए। तिल गुड़ के लडडू बनाने की विधि जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।
इसके अलावा साबुत अनाज , दाल , फलियाँ , चावल , पोहा , राजमा , हरी सब्जी , फल , दूध , घी , पनीर , अंडा और फलों में अनानास , केले , कीवी , प्लम , सूखे मेवे जैसे बादाम , काजू आदि पौष्टिक चीजें अपने दैनिक आहार में शामिल करने चाहिए। कोम्लेक्स कार्बोहाईड्रेट तथा फाइबर युक्त आहार लेने से भी PMS में बहुत लाभ होता है।
कुछ चीजों का परहेज करना चाहिए जो ये हैं –
— ज्यादा नमक वाली चीजे जैसे अचार , पापड़ आदि।
— कैफीन युक्त चीजें चाय कोफ़ी आदि।
— शक्कर क्योंकि इससे क्रेविंग बढ़ सकती है।
— शराब जिसके सेवन से दिमाग पर असर पड़ता है।
एक्सरसाइज़-
एक्सरसाइज़ करने से मन खुश होता है और थकान दूर हो सकती है। इसका फायदा लेने के लिए नियमित होना जरुरी है। हर दिन आधा घंटा एक्सरसाइज़ करें। यदि हर दिन ना कर पायें तो सप्ताह में चार पांच दिन कड़ी कसरत करें। इससे PMS के लक्षण कम होते महसूस होंगे।
योग प्राणायाम और स्वरुचि वाली गतिविधि
PMS के कारण तनाव , चिंता और चिडचिड़ापन बढ़ जाता है। इसे कम करने के लिए योग और प्राणायाम का अभ्यास करना अथवा अपनी रूचि के मनपसंद काम करने चाहिए। सुबह मॉर्निंग वॉक , घूमना , खेलना , तैरना आदि गतिविधि से भी मन प्रसन्न रहता है। प्राणायाम कब और कैसे करें जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।
इनके आलावा नींद पूरी लेनी चाहिए। पानी और तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में लेने चाहिए। खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करनी चाहिए। दिन में कुछ समय प्राकृतिक रौशनी में अवश्य बिताना चाहिए इससे भी सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है और मन प्रसन्न होता है। नकारात्मक विचारों से दूर रहने की कोशिश करें। पॉज़िटिव सोच रखें।
स्तन के सपोर्ट के लिए स्पोर्ट्स ब्रा का उपयोग किया जा सकता है। इसे रात में सोते समय भी पहन सकते हैं।
यदि सिर दर्द , पीठ दर्द , ऐंठन आदि से अधिक परेशानी हो तो दर्द निवारक दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जा सकता है।