ऊ से शुरू होने वाले हिन्दी मुहावरे / Hindi Idioms start with ऊ

( ऊ ) से शुरू वाले हिन्दी मुहावरे

‘ऊ’ से शुरू होने वाले हिन्दी के कुछ प्रसिद्ध मुहावरे और उनके अर्थ, वाक्य में प्रयोग सहित इस लेख द्वारा उपलब्ध कराये गए है।

ऊँच-नीच समझाना (अर्थ –भलाई-बुराई के बारे में बताना)-
वाक्य प्रयोग – माँ ने पुत्री ममता को ऊँच-नीच समझाकर ही पिकनिक पर जाने दिया।

ऊँट के गले में बिल्ली बाँधना (अर्थ –बेमेल काम करना)-
वाक्य प्रयोग – कम उम्र की लड़की का अधेड़ उम्र के व्यक्ति के साथ विवाह करना ऊँट के गले में बिल्ली बाँधना हैं।

ऊँट के मुँह में जीरा (अर्थ –अधिक आवश्यकता वाले के लिए थोड़ा सामान)-
वाक्य प्रयोग – पेटू रामदीन के लिए दो रोटी तो ऊँट के मुँह में जीरा हैं।

ऊल-जलूल बकना (अर्थ –अंट-शंट बोलना)-

वाक्य प्रयोग – वह तो यूँ ही ऊल-जलूल बकता रहता हैं, उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं देता।

ऊसर में बीज बोना या डालना (अर्थ –व्यर्थ कार्य करना)-
वाक्य प्रयोग – मैंने कौशिक से कहा कि अपने घर में दुकान खोलना तो ऊसर में बीज डालना हैं, कोई और स्थान देखो।

ऊँचा सुनना (अर्थ –कुछ बहरा होना)-
वाक्य प्रयोग – जरा जोर से बोलिए, मेरे पिताजी थोड़ा ऊँचा सुनते हैं।

ऊँच-नीच समझना (अर्थ –भलाई-बुराई की समझ होना)-
वाक्य प्रयोग – दूसरों को राय देने से पहले तुम्हें ऊँच-नीच समझ लेनी चाहिए।

ऊपर की आमदनी (अर्थ –नियमित स्रोत से न होने वाली आय)-
वाक्य प्रयोग – पुलिस की नौकरी में तनख्वाह भले ही कम हो पर ऊपर की आमदनी का तो कोई हिसाब ही नहीं हैं।

ऊपरी मन से कहना/करना (अर्थ –दिखावे के लिए कहना/करना)-
वाक्य प्रयोग – वह हमेशा ऊपरी मन से खाना खाने के लिए पूछती थी और मैं हमेशा मना कर देता था।




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