डेंगू से बचाव की तैयारी / Preparation of rescue from dengue

मानसून आने ही वाला है। हालांकि डेंगू बुखार का खतरा अब साल भर रहता है। फि‍र भी यह जरूरी है कि इस मौसम में आप डेंगू बुखार के बारे में जानें। ताकि समय रहते उससे बचाव की तैयारी कर सकें। डेंगू बुख़ार को “हड्डीतोड़ बुख़ार” के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि डेंगू बुखार से पीड़ित लोगों को इतना अधिक दर्द हो सकता है कि जैसे उनकी हड्डियां टूट गयी हों। डेंगू बुख़ार एक संक्रमण है जो डेंगू वायरस के कारण होता है। डेंगू का इलाज समय पर करना बहुत जरुरी होता हैं। मच्छर डेंगू वायरस को संचरित करते (या फैलाते) हैं।

कैसे फैलता है डेंगू
जब मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो इसकी लार मानव की त्वचा में प्रवेश कर जाती है। यदि मच्छर को डेंगू है तो वायरस इसकी लार में होता है। इसलिये जब मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो वायरस मच्छर की लार के साथ व्यक्ति की त्वचा में प्रविष्ट हो जाता है। वायरस व्यक्ति की श्वेत रक्त कणिकाओं से जुड़ कर उनमें प्रवेश कर जाता है। जब श्वेत रक्त कणिकाएं शरीर में इधर-उधर जाती हैं तो वायरस पुर्नउत्पादन करता है। श्वेत रक्त कणिकाएं कई तरह के संकेतों प्रोटीन (तथाकथित माइटोकाइन) के माध्यम से प्रतिक्रिया करती हैं जैसे इंटरल्यूकिन्स, इंटरफेरॉन तथा ट्यूमर परिगलन कारक। इन प्रोटीन के कारण डेंगू के साथ बुखार, फ्लू जैसे लक्षण तथा गंभीर दर्द पैदा होते हैं।

दिन में काटते हैं डेंगू के मच्छर
ये मच्छर रात की जगह दिन में काटते हैं। डेंगू होने पर शरीर में तेज बुखार के साथ साथ जोड़ों, मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द होता है। जी मिचलाना, शरीर पर छोटे लाल चकत्ते और आंख के पीछे दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। इसलिये बेहतर है कि इस बीमारी को होने से रोका जाए। साथ ही अगर किसी को डेंगू हो गया है तो आयुर्वेद के अनुसार नीम का इस्तेमाल करना चाहिये। नीम के लगभग हर हिस्से में कई औषधीय लाभ हैं।

Dengue-fever
डेंगूू में बुखार, सिरदर्द, त्वचा पर चेचक जैसे लाल चकत्ते तथा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शामिल हैं। कुछ लोगों में, डेंगू बुख़ार एक या दो ऐसे रूपों में हो सकता है जो जीवन के लिये खतरा हो सकते हैं।

डेंगू बुख़ार के लक्षण
डेंगूू में बुखार, सिरदर्द, त्वचा पर चेचक जैसे लाल चकत्ते तथा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शामिल हैं। कुछ लोगों में, डेंगू बुख़ार एक या दो ऐसे रूपों में हो सकता है जो जीवन के लिये खतरा हो सकते हैं। पहला, डेंगू रक्तस्रावी बुख़ार है, जिसके कारण रक्त वाहिकाओं (रक्त ले जाने वाली नलिकाएं), में रक्तस्राव या रिसाव होता है तथा रक्त प्लेटलेट्स (जिनके कारण रक्त जमता है) का स्तर कम हो जाता है। दूसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम है, जिससे खतरनाक रूप से निम्न रक्तचाप होता है।

ये हैं डेंगू बुखार के प्रकार
डेंगू वायरस चार भिन्न-भिन्न प्रकारों के होते हैं। यदि किसी व्यक्ति को इनमें से किसी एक प्रकार के वायरस का संक्रमण हो जाये तो आमतौर पर उसके पूरे जीवन में वह उस प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षित रहता है। हलांकि बाकी के तीन प्रकारों से वह कुछ समय के लिये ही सुरक्षित रहता है। यदि उसको इन तीन में से किसी एक प्रकार के वायरस से संक्रमण हो तो उसे गंभीर समस्याएं होने की संभावना काफी अधिक होती है।
डेंगू के इलाज के लिए घरेलू नुस्खे
गिलोय का आयुर्वेद में बहुत महत्व है। यह मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है।
मेथी के पत्ते बुखार कम करने के लिए सहायक हैं। यह पीड़ित का दर्द दूर कर उसे आसानी से नींद में मदद करती हैं। इसकी पत्तियों को पानी में भिगोकर उसके पानी को पीया जा सकता है। इसके अलावा, मेथी पाउडर को भी पानी में मिलाकर पी सकते हैं।
पपीते की पत्तियों को कूट कर खा सकते हैं या फिर इन्हें ड्रिंक की तरह भी पिया जा सकता है, जो कि बॉडी से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करते हैं। यह भी पढ़ें – नेशनल डेंगू डे : घर में ही मौजूद है डेंगू से बचने के उपाय
हल्दी मेटाबालिज्म बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। यही नहीं, घाव को जल्दी ठीक करने में भी मददगार साबित होती है। हल्दी को दूध में मिलाकर पीया जा सकता है।
तुलसी के पत्तों और दो ग्राम काली मिर्च को पानी में उबालकर पीना सेहत के लिए अच्छा रहता है। यह ड्रिंक आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाती है और एंटी-बैक्टीरियल तत्व के रूप में कार्य करती है।

डेंगू बुखार में जोखिम
डेंगू से पीड़ित वयस्कों से अधिक शिशुओं तथा बच्चों में बीमारी की गंभीरता होने की अधिक संभावना होती है। बच्चे यदि अच्छी तरह से पोषित हों तो उनके गंभीर रूप से बीमार होने की अधिक संभावना है। यह अन्य दूसरे संक्रमणों से भिन्न है जो कुपोषित, अस्वस्थ, या अच्छे पोषण की कमी वाले बच्चों में अधिक गंभीर होते हैं। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में गंभीर बीमारी की संभावना अधिक होती है। पुरानी (दीर्घ-अवधि) की बीमारियां जैसे मधुमेह तथा अस्थमा वाले लोगों में डेंगू जीवन के लिये खतरा हो सकता है।

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