‘क’ से शुरू होने वाले हिन्दी मुहावरे / Hindi Idioms start with क

( क ) से शुरू वाले हिन्दी मुहावरे

‘क’ से शुरू होने वाले हिन्दी के कुछ प्रसिद्ध मुहावरे और उनके अर्थ, वाक्य में प्रयोग सहित इस लेख द्वारा उपलब्ध कराये गए है।

कागजी घोड़े दौड़ाना (अर्थ – केवल लिखा-पढ़ी करना, पर कुछ काम की बात न होना)-

वाक्य प्रयोग – आजकल सरकारी दफ्तर में सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ते है; होता कुछ नही।

कान देना (अर्थ – ध्यान देना)-
वाक्य प्रयोग – पिता की बातों पर कण दिया करो।

कान खोलना (अर्थ – सावधान होना)-
वाक्य प्रयोग – कान खोलकर सुन लो तिम्हें जुआ नही खेलना है।

कण पकरना (अर्थ – बाज आना)-
वाक्य प्रयोग – कान पकड़ो की फिर ऐसा काम न करोगे।

कमर कसना (अर्थ – तैयार होना)-
वाक्य प्रयोग – शत्रुओं से लड़ने के लिए भारतीयों को कमर कसकर तैयार हो जाना चाहिए

कलेजा मुँह का आना (अर्थ – भयभीत होना )-
वाक्य प्रयोग – गुंडे को देख कर उसका कलेजा मुँह को आ गया

कलेजे पर साँप लोटना (अर्थ – डाह करना )-
वाक्य प्रयोग – जो सब तरह से भरा पूरा है, दूसरे की उत्रति पर उसके कलेजे पर साँप क्यों लोटे।

कमर टूटना (अर्थ – बेसहारा होना )-
वाक्य प्रयोग – जवान बेटे के मर जाने बाप की कमर ही टूट गयी।

किताब का कीड़ा होना (अर्थ – पढाई के अलावा कुछ न करना )-
वाक्य प्रयोग – विद्यार्थी को केवल किताब का कीड़ा नहीं होना चाहिए, बल्कि स्वस्थ शरीर और उत्रत मस्तिष्कवाला होनहार युवक होना है।

कलम तोड़ना (अर्थ – बढ़िया लिखना)-
वाक्य प्रयोग – वाह ! क्या अच्छा लिखा है। तुमने तो कलम तोड़ दी।

कोसों दूर भागना (अर्थ – बहुत अलग रहना)-
वाक्य प्रयोग – शराब की क्या बात, मै तो भाँग से कोसों दूर भागता हुँ।

कुआँ खोदना (अर्थ – हानि पहुँचाने के यत्न करना)-
वाक्य प्रयोग – जो दूसरों के लिये कुआँ खोदता है उसमे वह खुद गिरता है।

कल पड़ना (अर्थ – चैन मिलना)-
वाक्य प्रयोग – कल रात वर्षा हुई, तो थोड़ी कल पड़ी।

किरकिरा होना (अर्थ – विघ्र आना)-
वाक्य प्रयोग – जलसे में उनके शरीक न होने से सारा मजा किरकिरा हो गया।

किस मर्ज की दवा (अर्थ – किस काम के)-
वाक्य प्रयोग – चाहते हो चपरासीगीरी और साइकिल चलाओगे नहीं। आखिर तुम किस मर्ज की दवा हो?

कुत्ते की मौत मरना (अर्थ – बुरी तरह मरना)-
वाक्य प्रयोग – कंस की किस्मत ही ऐसी थी। कुत्ते की मौत मरा तो क्या।

काँटा निकलना (अर्थ – बाधा दूर होना)-
वाक्य प्रयोग – उस बेईमान से पल्ला छूटा। चलो, काँटा निकला।

कागज काला करना (अर्थ – बिना मतलब कुछ लिखना)-
वाक्य प्रयोग – वारिसशाह ने अपनी ‘हीर’ के शुरू में ही प्रार्थना की है- रहस्य की बात लिखनेवालों का साथ दो, कागज काला करनेवालों का नहीं।

किस खेत की मूली (अर्थ – अधिकारहीन, शक्तिहीन)-
वाक्य प्रयोग – मेरे सामने तो बड़ों-बड़ों को झुकना पड़ा है। तुम किस खेत की मूली हो ?

कंठ का हार होना (अर्थ – बहुत प्रिय होना)-
वाक्य प्रयोग – राजू अपनी दादी का कंठ का हार हैं, वह उसका बहुत ख्याल रखती हैं।

कंपकंपी छूटना (अर्थ – डर से शरीर काँपना)-
वाक्य प्रयोग – ताज होटल में आतंकवादियों को देखकर मेरी कंपकंपी छूट गई।

ककड़ी-खीरा समझना (अर्थ – तुच्छ या बेकार समझना)-
वाक्य प्रयोग – क्या तुमने मुझे ककड़ी-खीरा समझ रखा हैं, जो हर समय डाँटते रहते हो।

कचूमर निकालना (अर्थ – खूब पीटना)-
वाक्य प्रयोग – बस में लोगों ने जेबकतरे का कचूमर निकाल दिया।

कच्ची गोली खेलना (अर्थ – अनाड़ीपन दिखाना)-
वाक्य प्रयोग – मैंने कोई कच्ची गोली नहीं खेली हैं, जो मैं तुम्हारे कहने से नौकरी छोड़ दूँगा।

कटकर रह जाना (अर्थ – बहुत लज्जित होना)-
वाक्य प्रयोग – जब मैंने राजू से सबके सामने उधार के पैसे माँगे तो वह कटकर रह गया।

कड़वा घूँट पीना (अर्थ – चुपचाप अपमान सहना)-
वाक्य प्रयोग – पड़ोसी की जली-कटी सुनकर रामलाल कड़वा घूँट पीकर रह गए।

कढ़ी का-सा उबाल आना (अर्थ – जोश या क्रोध जल्दी खत्म हो जाना)-
वाक्य प्रयोग – किशन का क्रोध तो कढ़ी का-सा उबाल हैं, जल्दी शान्त हो जाएगा।

कतरनी-सी जबान चलना (अर्थ – बहुत बोलना (अर्थ – अधिकांशत : उल्टा-सीधा बोलना)-
वाक्य प्रयोग – अनुपम की कतरनी सी जबान चलती हैं तभी उससे कोई नहीं बोलता।

कदम उखड़ना (अर्थ – अपनी हार मान लेना या भाग जाना)-
वाक्य प्रयोग – पुलिस का सायरन सुनते ही चोरों के कदम उखड़ गए।

कदम पर कदम रखना (अर्थ – अनुकरण करना)-
वाक्य प्रयोग – महापुरुषों के कदम पर कदम रखना अच्छी आदत हैं।




कफ़न को कौड़ी न होना (अर्थ – बहुत गरीब होना)-
वाक्य प्रयोग – राजू बातें तो राजाओं की-सी करता हैं, पर कफ़न को कौड़ी नहीं हैं।

कफ़न सिर से बाँधना (अर्थ – लड़ने-मरने के लिए तैयार होना)-
वाक्य प्रयोग – हमारे सैनिक सिर से कफ़न बाँधकर ही देश की रक्षा करते हैं।

कबाब में हड्डी होना (अर्थ – सुख-शांति में बाधा होना)-
वाक्य प्रयोग – देखो मित्र, तुम दोनों बात करो, मैं यहाँ बैठकर कबाब में हड्डी नहीं बनूँगा।

कबाब होना (अर्थ – क्रोध या ईर्ष्या से जलना)-
वाक्य प्रयोग – मेरी सच्ची बात सुनकर राकेश कबाब हो गया।

कब्र में पाँव लटकना (अर्थ – मौत के निकट होना)-
वाक्य प्रयोग – सक्सेना जी के तो कब्र में पाँव लटक रहे हैं, अब वे लम्बी यात्रा नहीं कर सकते।

कमर सीधी करना (अर्थ – आराम करना, लेटना)-
वाक्य प्रयोग – मैं अभी चलता हूँ, जरा कमर सीधी कर लूँ।

कमान से तीर निकलना या छूटना (अर्थ – मुँह से बात निकलना)-
वाक्य प्रयोग – मित्र, कमान से तीर निकल गया हैं, अब मैं बात से पीछे नहीं हटूँगा।

कल न पड़ना (अर्थ – चैन न पड़ना या बेचैन रहना)-
वाक्य प्रयोग – जब तक दसवीं का परिणाम नहीं आएगा, मुझे कल नहीं पड़ेगी।

कलई खुलना (अर्थ – भेद प्रकट होना)-
वाक्य प्रयोग – जब सबके सामने रामू की कलई खुल गई तो वह बहुत लज्जित हुआ।

कलई खोलना (अर्थ – भेद खोलना या भण्डाफोड़ करना)-
वाक्य प्रयोग – राजू मुझे धमका रहा था कि यदि मैंने उसकी बात नहीं मानी तो वह मेरी कलई खोल देगा।

कलेजा काँपना (अर्थ – बहुत भयभीत होना)-
वाक्य प्रयोग – आतंकवाद के नाम से ही रामू का कलेजा काँप जाता हैं।

कलेजा टुकड़े-टुकड़े होना (अर्थ – बहुत दुःखी होना)-
वाक्य प्रयोग – उसकी कटु बातें सुनकर आज मेरा कलेजा टुकड़े-टुकड़े हो गया।

कलेजा ठण्डा होना (अर्थ – सुख-संतोष मिलना)-
वाक्य प्रयोग – जब रवि की नौकरी लग गई तब उसकी माँ का कलेजा ठण्ड हुआ।

कलेजा दूना होना (अर्थ – उत्साह और जोश बढ़ना)-
वाक्य प्रयोग – अपने उत्तीर्ण होने का समाचार पाकर उसका कलेजा दूना हो गया।

कलेजा पत्थर का करना (अर्थ – कठोर या निर्दयी बनना)-
वाक्य प्रयोग – उसने कलेजा पत्थर का करके अपने पुत्र को विदेश भेजा।

कलेजा पसीजना (अर्थ – दया आना)-
वाक्य प्रयोग – उसका विलाप सुनकर सबका कलेजा पसीज गया।

कलेजा फटना (अर्थ – बहुत दुःख होना)-
वाक्य प्रयोग – उस हृदय-विदारक दुर्घटना से मेरा तो कलेजा फट गया।

कलेजे का टुकड़ा (अर्थ – अत्यन्त प्यारा या पुत्र)-
वाक्य प्रयोग – रामू तो अपनी दादी का कलेजे का टुकड़ा हैं।

कलेजे पर छुरी चलना (अर्थ – बातें चुभना)-
वाक्य प्रयोग – उसकी बातों से कलेजे पर छुरियाँ चलती हैं।

कलेजे पर पत्थर रखना (अर्थ – जी कड़ा करना)-
वाक्य प्रयोग – ममता ने अपने कलेजे पर पत्थर रखकर अपनी पुत्री को विदा किया।

कलेजे में आग लगना (अर्थ – ईर्ष्या होना)-
वाक्य प्रयोग – अपने पड़ोसी की ख़ुशी देखकर शीतल के कलेजे में आग लग गई

कसक निकलना (अर्थ – बदला लेना या बैर चुकाना)-
वाक्य प्रयोग – वह मुझसे अपनी कसक निकालकर ही शान्त हुआ।

कसाई के खूँटे से बाँधना (अर्थ – निर्दयी या क्रूर मनुष्य के हाथों में देना)-
वाक्य प्रयोग – उसने खुद अपनी बेटी को कसाई के खूँटे से बाँध दिया हैं। अब कोई क्या करेगा ?

कहर टूटना (अर्थ – भारी विपत्ति या मुसीबत पड़ना)-
वाक्य प्रयोग – बाढ़ से फसल नष्ट होने पर रामू पर कहर टूट पड़ा।

कहानी समाप्त होना (अर्थ – मर जाना)-
वाक्य प्रयोग – थोड़ा बीमार होने के बाद उसकी कहानी समाप्त हो गई।

काँटे बोना (अर्थ – अनिष्ट करना)-
वाक्य प्रयोग – जो काँटे बोता हैं, उसे काँटे ही मिलते हैं।

काँटों पर लोटना (अर्थ – बेचैन होना)-
वाक्य प्रयोग – नौकरी छूटने के बाद राजू काँटों पर लोट रहा हैं।

काँव-काँव करना (अर्थ – खाहमखाह शोर करना)-
वाक्य प्रयोग – ये गाँव हैं, यहाँ ठीक से रहो, वर्ना सारा गाँव काँव-काँव करने लगेगा।

कागज की नाव (अर्थ – न टिकने वाली वस्तु)-
वाक्य प्रयोग – हमें अपने शरीर पर गर्व नहीं करना चाहिए, ये तो कागज की नाव हैं।

काजल की कोठरी (अर्थ – कलंक का स्थान)-
वाक्य प्रयोग – शराबघर तो काजल की कोठरी हैं, वहाँ मैं नहीं जाऊँगा।




काटो तो खून नहीं (अर्थ – स्तब्ध रह जाना)-
वाक्य प्रयोग – उसे काटो तो खून नहीं, अचानक अध्यापक जो आ गए थे।

काठ का उल्लू (अर्थ – महामूर्ख व्यक्ति)-
वाक्य प्रयोग – रामू तो काठ का उल्लू हैं। उसकी समझ में कुछ नहीं आता।

काठ मार जाना (अर्थ – सुन्न या स्तब्ध रह जाना)-
वाक्य प्रयोग – यह सुनकर मुझे तो काठ मार गया कि मेरा मित्र शहर छोड़कर चला गया।

काठ में पाँव देना (अर्थ – जान-बूझकर विपत्ति में पड़ना)-
वाक्य प्रयोग – तुलसी गाय-बजाय के देत काठ में पाँय।

कान का कच्चा (अर्थ – बिना सोचे-समझे दूसरों की बातों में आना)-
वाक्य प्रयोग – वह तो कान का कच्चा हैं, जो कहोगे वही मान लेगा।

कान काटना (अर्थ – चालाकी या धूर्तता में आगे होना)-
वाक्य प्रयोग – वह ऑफिस में अभी नया आया हैं, फिर भी सबके कान काटता हैं।

कान खाना (अर्थ – किसी बात को बार-बार कहना)-
वाक्य प्रयोग – अरे मित्र! कान मत खाओ, अब चुप भी हो जाओ।

कान गर्म करना (अर्थ – दण्ड देना)-
वाक्य प्रयोग – जब रामू ने अध्यापक का कहना नहीं माना तो उन्होंने उसके कान गर्म कर दिए।

कान या कानों पर जूँ न रेंगना (अर्थ – किसी की बात पर ध्यान न देना, अनसुनी करना)-
वाक्य प्रयोग – मैं चीख-चीख कर हार गया, पर मोहन के कान पर जूँ नहीं रेंगा।

कान फूँकना या कान भरना (अर्थ – किसी के विरुद्ध कोई बात कहना)-
वाक्य प्रयोग – रमा कान फूँकने में सबसे आगे हैं, इसलिए मैं उससे मन की बात नहीं करता।

कान भरना (अर्थ – पीठ-पीछे शिकायत करना)-
वाक्य प्रयोग – तुम बराबर मेरे खिलाफ अफसर के कान भरते हो।

कान में रुई डालकर बैठना (अर्थ – बेखबर या लापरवाह होना, किसी की बात न सुनना)-
वाक्य प्रयोग – अरे रामू! कान में रुई डाल कर बैठे हो क्या ? मैं कब से आवाज लगा रहा हूँ।

कानाफूसी करना (अर्थ – निन्दा करना)-
वाक्य प्रयोग – अरे भाई! क्या कानाफूसी कर रहे हो? हमारे आते ही चुप हो गए।

कानी कौड़ी न होना (अर्थ – जेब में एक पैसा न होना)-
वाक्य प्रयोग – अरे मित्र! तुम सौ रुपए माँग रहे हो, पर मेरी जेब में तो कानी कौड़ी भी नहीं हैं।

कानोंकान खबर न होना (अर्थ – चुपके-चुपके कार्य करना)-
वाक्य प्रयोग – प्रधानाध्यापक ने सभी अध्यापकों से कहा कि परीक्षा-प्रश्नपत्र आ गए हैं, किसी को इसकी कानोंकान खबर न हो।

काफूर हो जाना (अर्थ – गायब हो जाना)-
वाक्य प्रयोग – पुलिस को देखते ही वह शराबी न जाने कहाँ काफूर हो गया।

काम तमाम करना (अर्थ – किसी को मार डालना)-
वाक्य प्रयोग – लुटेरों ने कल रामू का काम तमाम कर दिया।

कायापलट होना (अर्थ – पूर्णरूप से बदल जाना)-
वाक्य प्रयोग – इस साल प्रधानाध्यापक ने विद्यालय की कायापलट कर दी हैं।

काल के गाल में जाना (अर्थ – मरना)-
वाक्य प्रयोग – इस वर्ष बिहार में सैकड़ों लोग काल के गाल में चले गए।

कालिख पोतना (अर्थ – कलंकित करना)-
वाक्य प्रयोग – ओम ने चोरी करके अपने परिवार पर कालिख पोत दी हैं।

काले कोसों जाना या होना (अर्थ – बहुत दूर जाना या बहुत दूर होना)-
वाक्य प्रयोग – रामू नौकरी के लिए घर छोड़कर काले कोसों चला गया हैं।

किला फतह करना (अर्थ – बहुत कठिन कार्य करना)-
वाक्य प्रयोग – रामू ने बारहवीं पास करके किला फतह कर लिया हैं।

किसी के कंधे से बंदूक चलाना (अर्थ – किसी पर निर्भर होकर कार्य करना)-
वाक्य प्रयोग – अरे मित्र! किसी के कंधे से बंदूक क्यों चलाते हो, आत्मनिर्भर बनो।

किसी के आगे दुम हिलाना (अर्थ – खुशामद करना)-
वाक्य प्रयोग – रामू मेरा मित्र हैं, वह मुझ पर मरता हैं अथवा वह मुझ पर जान छिड़कता हैं।

कीचड़ उछालना (अर्थ – किसी को बदनाम करना)-
वाक्य प्रयोग – बेवजह किसी पर कीचड़ उछालना ठीक नहीं होता।

कीड़े काटना (अर्थ – परेशानी होना)-
वाक्य प्रयोग – मात्र 5 मिनट पढ़ने के बाद रमा को कीड़े काटने लगते हैं।

कीड़े पड़ना (अर्थ – कमी या दोष होना)-
वाक्य प्रयोग – मेरे सेबों में क्या कीड़े पड़े हैं, जो आप नहीं खरीदते?

कुएँ का मेंढक (अर्थ – जिसे बहुत कम अनुभव हो)-
वाक्य प्रयोग – पवन तो कुएँ का मेंढक हैं – यह सब जानते हैं।

कुएँ में कूदना (अर्थ – संकट या खतरे का काम करना)-
वाक्य प्रयोग – इस मोहल्ले के सरपंच की गवाही देकर वह कुएँ में कूद गया हैं। अब देखो, क्या होता हैं?

कुएँ में बाँस डालना (अर्थ – बहुत खोजना)-
वाक्य प्रयोग – ओसामा बिन लादेन के लिए अमेरिका द्वारा कुओं में बाँस डाले गए, पर उसका कहीं पता नहीं चला।




कुत्ता काटना (अर्थ – पागल होना)-
वाक्य प्रयोग – मुझे क्या कुत्ते ने काटा हैं, जो इतनी रात वहाँ जाऊँगा।

कुत्ते की नींद सोना (अर्थ – अचेत होकर सोना/कम सोना)-
वाक्य प्रयोग – कुत्ते जैसी नींद अथवा कुत्ते की नींद सोने वाले विद्यार्थी निश्चय ही सफल होते हैं।

कुल्हिया में गुड़ फोड़ना (अर्थ – कोई कार्य छिपाकर करना)-
वाक्य प्रयोग – मित्र, तुम कितना भी कुल्हिया में गुड़ फोड़ लो, पर सबको ज्ञात हो गया हैं कि तुम्हारी लॉटरी खुल गई हैं।

कोढ़ में खाज होना (अर्थ – संकट पर संकट होना)-
वाक्य प्रयोग – रामू को तो कोढ़ में खाज हो गई हैं- पहले वह फेल हो गया, फिर बीमार पड़ गया।

कोर-कसर न रखना (अर्थ – जी-तोड़ प्रयास करना)-
वाक्य प्रयोग – मैंने पढ़ने में अपनी ओर से कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी हैं, आगे ईश्वर की इच्छा हैं।

कोरा जवाब देना (अर्थ – साफ इनकार करना)-
वाक्य प्रयोग – मैंने मामाजी से पैसे उधार माँगे तो उन्होंने मुझे कोरा जवाब दे दिया।

कोल्हू का बैल (अर्थ – अत्यधिक परिश्रमी व्यक्ति)-
वाक्य प्रयोग – धीरू चौबीस घण्टे काम करता हैं, वह तो कोल्हू का बैल हैं।

कौड़ियों के मोल बिकना (अर्थ – बहुत सस्ता बिकना)-
वाक्य प्रयोग – आजकल मकान कौड़ियों के मोल बिक रहे हैं।

कौड़ी कफ़न को न होना (अर्थ – बहुत गरीब होना)-
वाक्य प्रयोग – उसके पास कौड़ी कफ़न को नहीं हैं और बातें लाखों की करता हैं।

कौड़ी के तीन-तीन होना (अर्थ – बहुत सस्ता होना)-
वाक्य प्रयोग – आजकल तो कलर टी. वी. कौड़ी के तीन-तीन हैं। अब नहीं लोगे, तो कब लोगे?

कौड़ी को न पूछना (अर्थ – बहुत तुच्छ समझना)-
वाक्य प्रयोग – यह बिल्कुल सच हैं- गरीब आदमी को कोई कौड़ी को भी नहीं पूछता।

कौड़ी-कौड़ी दाँतों से पकड़ना (अर्थ – बहुत कंजूस होना)-
वाक्य प्रयोग – रामू इतना अमीर हैं, फिर भी कौड़ी-कौड़ी दाँतों से पकड़ता हैं।

क्रोध पी जाना (अर्थ – क्रोध को दबाना)-
वाक्य प्रयोग – रामू ने मुझे बहुत अपशब्द कहे, परन्तु उस समय मैं अपना क्रोध पी गया, वरना उससे झगड़ा हो जाता।

कंचन बरसना (अर्थ – लाभ ही लाभ होना)-
वाक्य प्रयोग – सेठजी पर लक्ष्मी की असीम कृपा है, चारों ओर कंचन बरस रहा है।

कन्नी काटना (अर्थ – आँख बचाकर भाग जाना)-
वाक्य प्रयोग – मेरा कर्ज न लौटना पड़े इसलिए वह आजकल मुझसे कन्नी काटता फिरता है।

कच्चा खा जाना (अर्थ – कठोर दंड देना)-
वाक्य प्रयोग – अगर उसके सामने झूठ बोला तो वह तुम्हें कच्चा खा जाएगी।

कच्चा चिट्ठा खोलना (अर्थ – गुप्त बातों का उद्घाटन करना)-
वाक्य प्रयोग – यदि तुमने मेरी बात न मानी तो सारी दुनिया के सामने तुम्हारा कच्चा चिट्ठा खोल दूँगा।

कानून छाँटना (अर्थ – निरर्थक तर्क उपस्थित करना)-
वाक्य प्रयोग – मेरे सामने ज्यादा कानून मत छाँटो, मेरा काम कर सकते हो कर दो।

किस्मत की धनी (अर्थ – भाग्यशाली)-
वाक्य प्रयोग – मेरा दोस्त सचमुच में किस्मत का धनी है पहले ही प्रयास में उसे नौकरी मिल गई।

कूप मंडूक (अर्थ – सीमित ज्ञान वाला व्यक्ति)-
वाक्य प्रयोग – रोहन तो कूप मंडूक है। उससे पढ़ाई-लिखाई की बात करना व्यर्थ है।

कान पकना (अर्थ – एक ही बात सुनते-सुनते तंग आ जाना)-
वाक्य प्रयोग – तुम्हारी बकवास सुनते-सुनते तो मेरे कान पक गए। अब बंद करो अपनी रामकथा।

काले पानी की सजा देना (अर्थ – देश निकाले का दंड देना)-
वाक्य प्रयोग – देश के साथ गद्दारी करने वालों को तो काले पानी की सजा होनी चाहिए।

केंचुल बदलना (अर्थ – व्यवहार बदलना)-
वाक्य प्रयोग – पहले तो मुझसे वह ठीक से बात करती थी पर अब न जाने क्यों उसने केंचुल बदल ली है।

कोठे पर बैठना (अर्थ – वेश्या का पेशा करना)-
वाक्य प्रयोग – वह बहुत बड़ा गुंडा है न जाने कितनी मासूम लड़कियों को कोठे पर बिठा चुका है।

क्या से क्या हो जाना (अर्थ – स्थिति बदल जाना)-
वाक्य प्रयोग – क्या से क्या हो गया? सोचा कुछ था हो कुछ गया।

क्या पड़ी है (अर्थ – कुछ जरूरत नहीं)-
वाक्य प्रयोग – तुमको क्या पड़ी है जो दूसरों के मामले में टाँग फँसाते हो।

कान खोलना (अर्थ – सावधान करना)-
वाक्य प्रयोग – मैंने उसके कान खोल दिये। अब वह किसी के चक्कर में नहीं आयेगा।

कान खड़े होना (अर्थ – होशियार होना)-
वाक्य प्रयोग – दुश्मनों के रंग-ढंग देखकर मेरे कान खड़े हो गये।

कान फूंकना (अर्थ – दीक्षा देना, बहकाना)-
वाक्य प्रयोग – मोहन के कान सोहन ने फूंके थे, फिर उसने किसी की कुछ न सुनी।

कान लगाना (अर्थ – ध्यान देना)-
वाक्य प्रयोग – उसकी बातें कान लगाने योग्य हैं।




कान में तेल डालना (अर्थ – कुछ न सुनना)-
वाक्य प्रयोग – मैं कहते-कहते थक गया, पर ये कान में तेल डाले बैठे हैं।

कान काटना (अर्थ – बढ़कर काम करना)-
वाक्य प्रयोग – उसे छोटा न समझो, भाषण देने में तो वह बड़े-बड़ों के कान काटता है।

कान देना (अर्थ – ध्यान देना)-
वाक्य प्रयोग – शिक्षकों की बातों पर कान दीजिए।

कान पकना (अर्थ – व्यर्थ बकवास सुनते रहने से चिढ)-
वाक्य प्रयोग – मकान मालिक के ताने सुन-सुन कर किरायदार के कान पक गए और उन्होंने किराये का मकान छोड़ दिया।

कान पकड़ना (अर्थ – अनुचित न करने की प्रतिज्ञा करना)-
वाक्य प्रयोग – अब से मैं कान ऐंठता हूँ कि कभी ऐसी गुस्ताखी न करूँगा।

कलेजा निकाल कर रख देना (अर्थ – हृदय की बात कहना)-
वाक्य प्रयोग – ‘प्रणय-पत्रिका’ के एक-एक गीत में बच्चन ने अपनी कल्पित प्रेयसी के प्रति कलेजा निकालकर रख दिया है।

कलेजा ठंढा होना (अर्थ – डाह पूरा होने पर संतोष)-
वाक्य प्रयोग – कुणाल के अंधा भिखारी होने पर उसका कलेजा ठंडा हुआ।

कलेजा काढ़ना (अर्थ – प्रिय वस्तु का चला जाना)-
वाक्य प्रयोग – उसने मेरी पांडुलिपि क्या खो दी, मेरा कलेजा काढ़ लिया।

कलेजा फटना (अर्थ – ईर्ष्या होना)-
वाक्य प्रयोग – मुझे क्या सरकारी नौकरी मिल गयी कि मेरे एक घरवारी सहयोगी का कलेजा ही फटने लगा।

कलेजा टूक-टूक होना (अर्थ – हृदय पर गहरा आघात पहुँचना)-
वाक्य प्रयोग – नृप हरिश्चंद्र की विपत्तियों को देखकर किसका कलेजा टूक-टूक नहीं होता ?

कलेजा मुँह को आना (अर्थ – अत्यंत आतुरता)-
वाक्य प्रयोग – उसकी बीमारी देखकर कलेजा मुँह को आता है।

कलेजे पर साँप लोटना (अर्थ – किसी की उन्नति याद कर जलन होना)-
वाक्य प्रयोग – राम के राज्याभिषेक की खबर पर कैकयी की दासी मंथरा तक के कलेजे पर साँप लोटने लगा।

कलेजे पर पत्थर रखना (अर्थ – दिल मजबूत करना)-
वाक्य प्रयोग – छोटे भाई विभीषण की दगाबाजी पर रावण ने कलेजे पर पत्थर रख लिया, इसके सिवा उसके पास चारा ही क्या था।

कलेजा चीरकर दिखाना (अर्थ – पूर्ण विश्र्वास दिलाना)-
वाक्य प्रयोग – तुम्हीं मेरे सब कुछ हो, यह मैं कलेजा चीरकर दिखा सकता हूँ।

कमर कसना (अर्थ – दृढ़ निश्र्चय करना)-
वाक्य प्रयोग – विजय चाहते हो, तो युद्ध के लिए कमर कस लो।

कमर सीधी करना (अर्थ – परिश्रम के बाद विश्राम)-
वाक्य प्रयोग – अभी तो टेस्ट परीक्षा समाप्त हुई है; जरा कमर सीधी करने दो, फिर पढ़ाई चलेगी।

कमर टूटना (अर्थ – निरुत्साह होना)-
वाक्य प्रयोग – परीक्षा में कई बार फेल होने से उसकी कमर ही टूट गयी।




क्यू में लगा रहना- (अर्थ – बहुत देर तक प्रतीक्षा करना)

कंट्रोल करना- (अर्थ – नियंत्रण करना)

कान उमेठना- (अर्थ – शपथ लेना)

कानों कान खबर होना- (अर्थ – बात फैलना)

कानों में ऊँगली देना- (अर्थ – किसी बात को सुनने की चेष्टा न करना)

कलेजे से लगाना- (अर्थ – प्यार करना, छाती से चिपका लेना)

कलेजा काँपना- (अर्थ – डरना)

कलेजा थामकर रह जाना- (अर्थ – अफसोस कर रह जाना)

कर्ण का दान- (अर्थ – महादान)

कारूं का खजाना- (अर्थ – अतुल धनराशि)

कुबेर का धन/कोश- (अर्थ – अतुल धनराशि)

कुम्भकर्णी नींद- (अर्थ – बहुत गहरी, लापरवाही की नींद)

कलेजा फटना- (अर्थ – दिल पर बेहद चोट पहुँचना)

करवटें बदलना- (अर्थ – अड़चन डालना)

काला अक्षर भैंस बराबर- (अर्थ – अनपढ़, निरा मूर्ख)

काँटों में घसीटना- (अर्थ – संकट में डालना)

काम तमाम करना- (अर्थ – मार डालना)

किनारा करना- (अर्थ – अलग होना)

कोदो देकर पढ़ना- (अर्थ – अधूरी शिक्षा पाना)

कपास ओटना- (अर्थ – सांसरिक काम-धन्धों में लगे रहना)

कोल्हू का बैल- (अर्थ – खूब परिश्रमी)

कौड़ी का तीन समझना- (अर्थ – तुच्छ समझना)

कौड़ी काम का न होना- (अर्थ – किसी काम का न होना)

कौड़ी-कौड़ी जोड़ना- (अर्थ – छोटी-मोटी सभी आय को कंजूसी के साथ बचाकर रखना)

कटे पर नमक छिड़कना (अर्थ –  विपत्ति के समय और दुःख देना)

कोहराम मचाना- (अर्थ – दुःखपूर्ण चीख -पुकार)




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